हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 11.12

अध्याय 11 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
प्रतू॑र्त्तं वाजि॒न्नाद्र॑व॒ वरि॑ष्ठा॒मनु॑ सं॒वत॑म्। दि॒वि ते॒ जन्म॑ पर॒मम॒न्तरि॑क्षे॒ तव॒ नाभिः॑ पृथि॒व्यामधि॒ योनि॒रित् ॥ (१२)
हे अग्नि देव! आप अत्यंत त्वरणशील (शीघ्र कार्य करने वाले) हैं. आप धनवान वरिष्ठ हैं. स्वर्गलोक में आप का जन्म हुआ है. अंतरिक्ष में आप का नाभि स्थल है. पृथ्वीलोक आप की योनि है. आप पृथ्वीलोक पर अधिष्ठित होने की कृपा कीजिए. (१२)
O God of Fire! You are extremely acceleration. You are a wealthy senior. You were born in heaven. Space is your navel site. Earth is your vagina. Please be installed on earth. (12)