यजुर्वेद (अध्याय 11)
यु॒ञ्जाथा॒ रास॑भं यु॒वम॒स्मिन् यामे॑ वृषण्वसू। अ॒ग्निं भर॑न्तमस्म॒युम् ॥ (१३)
आप दोनों (पुरोहित और यजमान) पर लाभकारी धन बरसे. आप अग्नि को प्रज्वलित करने में समर्थ हैं. आप रासभ (प्रज्वलित अग्नि और मंत्र) को यज्ञ कार्य में जोड़ने की कृपा कीजिए. (१३)
Beneficial money poured on both of you (priest and host). You are capable of igniting agni. Please add Rasabh (ignited agni and mantra) to the yajna work. (13)