हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 11.40

अध्याय 11 → मंत्र 40 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
सुजा॑तो॒ ज्योति॑षा स॒ह शर्म॒ वरू॑थ॒मास॑द॒त् स्वः। वासो॑ऽअग्ने वि॒श्वरू॑प॒ꣳ संव्य॑यस्व विभावसो ॥ (४०)
हे अग्नि! आप अच्छी तरह उत्पन्न होने बाले हैं. आप ज्वालाओं के साथ वेदी को शोभित करने की कृपा कीजिए. आप सुखद व विभावान (कांतिमान) हैं. आप विशव रूप वाली पृथ्वी पर वास करते हैं. (४०)
O agni! You are well-produced. Please adorn the altar with flames. You are pleasant and radiant. You live on a worldly earth. (40)