हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 11.5

अध्याय 11 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
यु॒जे वां॒ ब्रह्म॑ पू॒र्व्यं नमो॑भि॒र्वि श्लोक॑ऽएतु प॒थ्येव सू॒रेः। शृ॒ण्वन्तु॒ विश्वे॑ऽअ॒मृत॑स्य पु॒त्राऽआ ये धामा॑नि दि॒व्यानि॑ त॒स्थुः ॥ (५)
हे यजमान दंपती! हम परम शक्ति को नमस्कार करते हुए यज्ञ शुरू करते हैं. हम विशिष्ट श्लोकों से यह यज्ञ संपन्न करते हैं. हमारी यह उपासना सविता देव के पथ में पहुंचने की कृपा करे. अमरता के पुत्र दिव्य धाम में बैठे हुए देवगण हमारी इन स्तुतियों को सुनने की कृपा करें. (५)
O host couple! We start the yajna by saluting the supreme power. We perform this yajna with specific verses. Please this worship of ours to reach the path of Savita Dev. May the gods sitting in the divine abode, the sons of immortality, please listen to these praises of ours. (5)