यजुर्वेद (अध्याय 11)
यु॒ञ्जते॒ मन॑ऽउ॒त यु॑ञ्जते॒ धियो॒ विप्रा॒ विप्र॑स्य बृह॒तो वि॑प॒श्चितः॑। वि होत्रा॑ दधे वयुना॒विदेक॒ऽइन्म॒ही दे॒वस्य॑ सवि॒तुः परि॑ष्टुतिः ॥ (४)
विशेष रूप से ज्ञानी ऋत्विज् यजमान के विशाल यज्ञ को सफल बनाने के लिए मन और बुद्धि को जोड़ते हैं. वह होता सभी विज्ञानों को जानने वाला है. वही उन्हें धारण भी करता है. सविता देव की स्तुति महिमामयी व संतोषदायी है. (४)
Especially the wise people combine the mind and intellect to make the huge yajna of the Ritwijjaman a success. He knows all sciences. He also holds them. The praise of Savita Dev is glorious and satisfying. (4)