हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 11.80

अध्याय 11 → मंत्र 80 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
योऽअ॒स्मभ्य॑मराती॒याद्यश्च॑ नो॒ द्वे॑षते॒ जनः॑। निन्दा॒द्योऽअ॒स्मान् धिप्सा॑च्च॒ सर्वं॒ तं भ॑स्म॒सा कु॑रु ॥ (८०)
हे अग्नि! जो लोग हम से द्वेष करें, आप उन सब का नाश करने की कृपा कीजिए. आप उन सभी का नाश करने की कृपा कीजिए, जो हमारी निडरता में बाधक बनें और जो हमारी निंदा करते हैं. (८०)
O agni! Those who hate us, please destroy all of them. Please destroy all those who hinder our fearlessness and those who condemn us. (80)