यजुर्वेद (अध्याय 12)
अग्ने॒ यत्ते॑ शु॒क्रं यच्च॒न्द्रं यत्पू॒तं यच्च॑ य॒ज्ञिय॑म्। तद्दे॒वेभ्यो॑ भरामसि ॥ (१०४)
हे अग्नि! आप की जो ज्वाला चमकीली और चंद्रमा जैसी है, आप की जो ज्वाला पवित्र है और यज्ञ से संबंधित है, हम उन्हें आहुति अर्पित करते हैं. (१०४)
O agni! We offer sacrifices to your flame which is bright and like the moon, your flame which is sacred and related to yajna. (104)