हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 12.103

अध्याय 12 → मंत्र 103 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
अ॒भ्याव॑र्त्तस्व पृथिवि य॒ज्ञेन॒ पय॑सा स॒ह। व॒पां ते॑ऽअ॒ग्निरि॑षि॒तोऽअ॑रोहत् ॥ (१०३)
हे पृथ्वी! यज्ञ से होने वाली बरसात के साथ आप हमारे अनुकूल होने की कृपा कीजिए. आप अग्नि पर आरोहण करने की कृपा कीजिए. (१०३)
O earth! Please be friendly to us with the rain from yajna. Please climb the agni. (103)