हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 12.113

अध्याय 12 → मंत्र 113 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
सं ते॒ पया॑सि समु॑ यन्तु॒ वाजाः॒ सं वृष्ण्या॑न्यभिमाति॒षाहः॑। आ॒प्याय॑मानोऽअ॒मृता॑य सोम दि॒वि श्रवा॑स्युत्त॒मानि॑ धिष्व ॥ (११३)
हे सोम! आप पोषक रस और अन्न बरसाने की कृपा करें. आप अमृत से तृप्त कीजिए. आप स्वर्गलोक में विख्यात हैं. आप चिरकाल तक स्थिर होने की कृपा कीजिए. (११३)
O Mon! Please shower nutritious juices and food. You satisfy with nectar. You are famous in heaven. Please be stable forever. (113)