हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 12.114

अध्याय 12 → मंत्र 114 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
आप्या॑यस्व मदिन्तम॒ सोम॒ विश्वे॑भिर॒ꣳशुभिः॑। भवा॑ नः स॒प्रथ॑स्तमः॒ सखा॑ वृ॒धे ॥ (११४)
हे सोम! आप आनंददाता हैं. आप सर्वत्र प्रसन्न होने की कृपा कीजिए. आप शुभ होइए. आप विख्यात और हमारे मित्र हैं. आप बढ़ोतरी पाइए. (११४)
O Mon! You are the giver of joy. Please be happy everywhere. You be good. You are famous and our friend. You get an increase. (114)