हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 12.115

अध्याय 12 → मंत्र 115 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
आ ते॑ व॒त्सो मनो॑ यमत् पर॒माच्चि॑त् स॒धस्था॑त्। अग्ने॒ त्वाङ्का॑मया गि॒रा ॥ (११५)
हे अग्नि! हम आप के पुत्र हैं. आप परम स्थान पर विराजते हैं. हम श्रेष्ठ सतोत्रों से आप की वाणीमय बंदना करते हैं. (११५)
O agni! We are your sons. You sit in the ultimate place. We worship you with the best satotras. (115)