यजुर्वेद (अध्याय 12)
सीद॒ त्वं मा॒तुर॒स्याऽउ॒पस्थे॒ विश्वा॑न्यग्ने व॒युना॑नि वि॒द्वान्। मैनां॒ तप॑सा॒ मार्चिषा॒ऽभिशों॑चीर॒न्तर॑स्या शु॒क्रज्यो॑ति॒र्विभा॑हि ॥ (१५)
हे अग्नि! माता की गोद में बैठने की तरह आप इस आसन पर विराजिए. आप सर्वज्ञ और दिद्वान् हैं. आप अपने ताप से इस मचया को मत तपाइए. आप अपनी भीतरी ज्योति से हमेशा चमकिए. (१५)
O agni! Like sitting on the lap of the mother, you sit on this seat. You are omniscient and distwan. Don't heat this with your heat. Always shine with your inner light. (15)