यजुर्वेद (अध्याय 12)
शि॒वो भू॒त्वा मह्य॑मग्ने॒ऽअथो॑ सीद शि॒वस्त्वम्। शि॒वाः कृ॒त्वा दिशः॒ सर्वाः॒ स्वं योनि॑मि॒हास॑दः ॥ (१७)
हे अग्नि! आप मेरे प्रति भी कल्याणमय हो कर इस उखे के घर में विराजिए. यहां भी कल्याणकारी हो कर ही रहिए. आप सभी दिशाओं को कल्याणकारी बनाइए. अग्नि! यह उखा आप का मूल स्थान है. आप इस में स्थित होने की कृपा कीजिए. (१७)
O agni! You should also be kind to me and sit in this house. Stay here too, be a benefactor. You make all directions welfare. Fire! This is your native place. Please be located in this. (17)