यजुर्वेद (अध्याय 12)
स॒ह र॒य्या निव॑र्त्त॒स्वाग्ने॒ पिन्व॑स्व॒ धा॑रया। वि॒श्वप्स्न्या॑ वि॒श्वत॒स्परि॑ ॥ (४१)
हे अग्नि! आप हमें पुनः धन के साथ प्राप्त होइए. आप वर्षा की धारा से पृथ्वी पर सारी वनस्पति को बढ़ाने की कृपा करें. (४१)
O agni! You get us back with money. Please increase all the vegetation on the earth with the stream of rain. (41)