हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 12.42

अध्याय 12 → मंत्र 42 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
बोधा॑ मेऽअ॒स्य वच॑सो यविष्ठ॒ मꣳहि॑ष्ठस्य॒ प्रभृ॑तस्य स्वधावः। पीय॑ति त्वो॒ऽअनु॑ त्वो गृणाति व॒न्दारु॑ष्टे त॒न्वं वन्देऽअग्ने ॥ (४२)
हे अग्नि! आप हमारे इन वचनों को सुनिए. प्रसन्न व्यक्ति आप की और रुष्ट व्यक्ति आप को कोसते हैं. हम आप के तन का वंदन करते हैं. (४२)
O agni! Listen to our words. Happy people curse you and angry people curse you. We salute your body. (42)