यजुर्वेद (अध्याय 12)
सं वां॒ मना॑सि॒ सं व्र॒ता समु॑ चि॒त्तान्याक॑रम्। अग्ने॑ पुरीष्याधि॒पा भ॑व॒ त्वं न॒ इष॒मूर्जं॒ यज॑मानाय धेहि ॥ (५८)
हे अग्नि! हमारे मन समान हों. हमारे संकल्प समान हों. हे अग्नि! आप पुरियों के स्वामी हैं. आप हमें ऊर्जस्वी बनाइए. आप यजमान के लिए ऊर्जा धारिए. (५८)
O agni! Let our minds be the same. Let our resolutions be the same. O agni! You are the deva of puris. You make us energetic. You hold energy for the host. (58)