हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 12.64

अध्याय 12 → मंत्र 64 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
यस्या॑स्ते घोरऽआ॒सञ्जु॒होम्ये॒षां ब॒न्धाना॑मव॒सर्ज॑नाय। यां त्वा॒ जनो॒ भूमि॒रिति॑ प्र॒मन्द॑ते॒ निर्ऋ॑तिं त्वा॒हं परि॑ वेद वि॒श्वतः॑ ॥ (६४)
हे निर्ऋते! आप क्रूर स्वभाव वाली हैं. हम जन्ममरण के बंधन से मुक्त होने के लिए आप को आहुति भेंट करते हैं. भले ही लोग आप को भूमि कहते हैं, पर वे आप को सब ओर से सर्वज्ञ मानते हैं. (६४)
O nirvite! You are cruel in nature. We offer sacrifices to you to be free from the bondage of birth. Even though people call you the land, they consider you omniscient on all sides. (64)