यजुर्वेद (अध्याय 17)
अश्म॒न्नूर्जं॒ पर्व॑ते शिश्रिया॒णाम॒द्भ्यऽओष॑धीभ्यो॒ वन॒स्पति॑भ्यो॒ऽअधि॒ सम्भृ॑तं॒ पयः॑। तां न॒ऽइष॒मूर्जं॑ धत्त मरुतः सꣳररा॒णाऽअश्म॑ꣳस्ते॒ क्षुन् मयि॑ त॒ऽऊर्ग्यं॑ द्वि॒ष्मस्तं ते॒ शुगृ॑च्छतु ॥ (१)
हे मरुद्गण! आप हमें अन से ऊर्जस्वी बनाने की कृपा करें. आप पत्थरों, ओषधियों, जलों व बनस्पतियों का बल धारिए. उन्हें और अधिक रसपूर्ण बनाइए. आप अन्न धारिए. आप की क्षुधा शांत हो. आप का क्रोध उन लोगों पर हो, जो हम से द्वेष रखते हैं. (१)
O Desertion! Please make us energetic from un. You should hold the strength of stones, medicines, waters and plants. Make them more juicy. You eat food. You're cool apps. Your anger should be on those who hate us. (1)