यजुर्वेद (अध्याय 17)
उद्ध॑र्षय मघव॒न्नायु॑धा॒न्युत्सत्व॑नां माम॒कानां॒ मना॑सि। उद् वृ॑त्रहन् वा॒जिनां॒ वाजि॑ना॒न्युद्रथा॑नां॒ जय॑तां यन्तु॒ घोषाः॑ ॥ (४२)
हे इंद्र देव! आप धनवान हैं. आप अपने आयुधों को तीखा कीजिए. वीरों को व घोड़ों को शीघ्र जाने के लिए उत्साहित कीजिए. आप शत्रुनाशक व बलशाली हैं. रथों के जयघोष सब ओर गूंजें. (४२)
O Lord Indra! You are rich. Sharpen your weapons. Encourage the heroes and the horses to leave soon. You are hostile and powerful. The chants of chariots echoed everywhere. (42)