हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 17.45

अध्याय 17 → मंत्र 45 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
अव॑सृष्टा॒ परा॑ पत॒ शर॑व्ये॒ ब्रह्म॑सꣳशिते। गच्छा॒मित्रा॒न् प्र प॑द्यस्व॒ मामीषां॒ कञ्च॒नोच्छि॑षः ॥ (४५)
ब्रह्मज्ञानमय वचनों से बाण तीखे हो कर अमित्रों पर गिरें. शत्रुओं पर प्रहार करें. उन का उच्छेदन (विनाश) करें. (४५)
With the words of Brahmagyan, the arrows should be sharp and fall on the unfriendly. Attack enemies. Exhume them. (45)