यजुर्वेद (अध्याय 17)
यत्र॑ बा॒णाः स॒म्पत॑न्ति कुमा॒रा वि॑शि॒खाऽइ॑व। तन्न॒ऽइन्द्रो॒ बृह॒स्पति॒रदि॑तिः॒ शर्म॑ यच्छतु वि॒श्वाहा॒ शर्म॑ यच्छतु ॥ (४८)
जहां बाण ऐसे गिरे जैसे बिना चोटी वाले बालक गिरते हैं, वहां इंद्र देव हमें सुख प्रदान करों. बृहस्पति देव हमें सुख प्रदान करें. अदिति देव हमें सुख प्रदान करें. स्वामी देव हमें सुख प्रदान करें. (४८)
Where arrows fall as if children without braids fall, may Indra Dev give us happiness. May Jupiter give us happiness. May Aditi Dev give us happiness. May Swami Dev give us happiness. (48)