यजुर्वेद (अध्याय 17)
उ॒क्षा स॑मु॒द्रोऽअ॑रु॒णः सु॑प॒र्णः पूर्व॑स्य॒ योनिं॑ पि॒तुरावि॑वेश। मध्ये॑ दि॒वो निहि॑तः॒ पृश्नि॒रश्मा॒ वि च॑क्रमे॒ रज॑सस्पा॒त्यन्तौ॑ ॥ (६०)
सूर्य वर्षा द्वारा समुद्र को सौंचते हैं. वे समुद्र को धारते हैं. उन का मूल स्थान पूर्व दिशा है. वे अंतरिक्ष में निरंतर भ्रमणशील व स्वर्गलोक के बीच निहित रहते हैं. वे रज की रक्षा करते हैं. वे अद्भुत रश्मियों वाले और सर्वत्र भ्रमणशील हैं. (६०)
The sun beautifies the sea with rain. They stumble the sea. Their original place is east direction. They are constantly moving in space and are contained in heaven. They protect Raja. They are amazing and traveling everywhere. (60)