हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 19.17

अध्याय 19 → मंत्र 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
वेद्या॒ वेदिः॒ समा॑प्यते ब॒र्हिषा॑ ब॒र्हिरि॑न्द्रि॒यम्। यूपे॑न॒ यूप॑ऽआप्यते॒ प्रणी॑तोऽअ॒ग्निर॒ग्निना॑ ॥ (१७)
इस यज्ञ में वेदी से वेदी को प्राप्त किया जाता है. इस यज्ञ में कुशा से कुशा को प्राप्त किया जाता है. इस यज्ञ में इंद्रियों से इंद्रिय ज्ञान प्राप्त किया जाता है. इस यज्ञ में स्तंभ से स्तंभ को प्राप्त किया जाता है. इस यज्ञ में अग्नि से अग्नि को प्राप्त किया जाता है. (१७)
In this yajna, the altar is obtained from the altar. Kusha is obtained from Kusha in this yajna. In this yajna, sense knowledge is obtained from the senses. In this yajna, pillar is obtained from pillar. In this yajna, agni is obtained from agni. (17)