यजुर्वेद (अध्याय 19)
ह॒वि॒र्धानं॒ यद॒श्विनाग्नी॑ध्रं॒ यत्सर॑स्वती। इन्द्रा॑यै॒न्द्रꣳसद॑स्कृ॒तं प॑त्नी॒शालं॒ गार्ह॑पत्यः ॥ (१८)
अश्विनीकुमार से हवि का धान प्राप्त होता है. सरस्वती देवी से आग्नीश्च प्राप्त होता है. यज्ञ सदन में, पलीशाला में तथा गार्हपत्य अग्नि में इंद्र देव के ऐश्वर्य के अनुकूल हवि देवगणों द्वारा प्रस्तुत की जाती है. (१८)
Havi's paddy is obtained from Ashwinikumar. Agnischa is obtained from Saraswati Devi. The yajna is presented by the Havi Devgans in the house, in the palishala and in the garhapatya agni, according to the opulence of Indra Dev. (18)