यजुर्वेद (अध्याय 19)
बर्हि॑षदः पितरऽऊ॒त्यर्वागि॒मा वो॑ ह॒व्या च॑कृमा जु॒षध्व॑म्। तऽआग॒ताव॑सा॒ शन्त॑मे॒नाथा॑ नः॒ शंयोर॑र॒पो द॑धात ॥ (५५)
हे पितरगण! आप कुश के आसन पर विराजते हैं. हम आप के लिए ऊंचेऊंचे स्वर में स्तुति गाते हैं. हम आप के लिए हवि समर्पित करते हैं. आप प्रसन्नता से इस हवि को ग्रहण करने व रक्षा साधनों से इस यज्ञ में पधारने की कृपा कीजिए. आप हमारे लिए सुख धारिए. (५५)
O fathers! You sit on the seat of Kush. We sing praises to you in a loud voice. We dedicate havi to you. Please accept this havi with happiness and come to this yajna with defense means. May you enjoy happiness for us. (55)