हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 19.57

अध्याय 19 → मंत्र 57 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
उप॑हूताः पि॒तरः॑ सो॒म्यासो॑ बर्हि॒ष्येषु नि॒धिषु॑ प्रि॒येषु॑। तऽआग॑मन्तु॒ तऽइ॒ह श्रु॑व॒न्त्वधि॑ ब्रुवन्तु॒ तेऽवन्त्व॒स्मान् ॥ (५७)
हम पितरों व सोमरस के इच्छुक पितरों का आह्वान करते हैं. हम कुश के आसन पर विराजित पितरों का आह्वान करते हैं. पितरगण हमारे प्रिय वचनों व हमारी बोली हुई स्तुतियों को सुनने और हमारी रक्षा करने की कृपा करें. (५७)
We call upon the fathers who want to be sommers. We invoke the ancestors sitting on the seat of Kush. May the fathers be pleased to listen to our beloved words and our spoken praises and protect us. (57)