यजुर्वेद (अध्याय 19)
येऽअ॑ग्निष्वा॒त्ता येऽअन॑ग्निष्वात्ता॒ मध्ये॑ दि॒वः स्व॒धया॑ मा॒दय॑न्ते। तेभ्यः॑ स्व॒राडसु॑नीतिमे॒तां य॑थाव॒शं त॒न्वं कल्पयाति ॥ (६०)
जो पितर अग्नि के समान तेजस्वी हैं, जो पितर स्वर्गलोक के बीच में हैं, वे पितर स्वधा से आनंदित होते हैं. उन को स्वयं प्रकाशित परमात्मा अच्छी नीयत प्रदान करें. उन के शरीर को आवश्यकता के अनुसार कर्म का फल प्रदान करने की कृपा करें. (६०)
Those who are as bright as the pitra agni, those who are in the middle of the pitar heaven, they are happy with pitar swadha. May God give them good intentions by publishing themselves. Please provide the fruits of karma to their body as per the need. (60)