यजुर्वेद (अध्याय 19)
दृ॒ष्ट्वा रू॒पे व्याक॑रोत् सत्यानृ॒ते प्र॒जाप॑तिः। अश्र॑द्धा॒मनृ॒तेऽद॑धाच्छ्र॒द्धा स॒त्ये प्र॒जाप॑तिः। ऋ॒तेन॑ स॒त्यमि॑न्द्रि॒यं वि॒पान॑ꣳ शु॒क्रमन्ध॑स॒ऽइन्द्र॑स्येन्द्रि॒यमि॒दं पयो॒ऽमृ॒तं मधु॑ ॥ (७७)
प्रजापति ने सत्य और असत्य दोनों को अलगअलग रूपों में स्थापित किया प्रजापति ने असत्य को अश्रद्धा व सत्य को श्रद्धा के रूप में स्थापित किया. ऋत से सत्य की प्राप्ति कराता है. यह इंद्रियों में सामर्थ्य प्रदान कराता है. यह हमें दूध, अमृत व मधुर पदार्थ की प्राप्ति कराता है. (७७)
Prajapati established both truth and falsehood in different forms Prajapati established untruth as irreverence and truth as faith. He attains truth from the truth. It provides strength in the senses. It gives us milk, nectar and sweet substances. (77)