यजुर्वेद (अध्याय 19)
वेदे॑न रू॒पे व्य॑पिबत् सुतासु॒तौ प्र॒जाप॑तिः। ऋ॒तेन॑ स॒त्यमि॑न्द्रि॒यं वि॒पान॑ꣳ शु॒क्रमन्ध॑स॒ऽइन्द्र॑स्येन्द्रि॒यमि॒दं पयो॒ऽमृतं॒ मधु॑ ॥ (७८)
प्रजापति ने वेदों से ग्राहय और अग्राहय रूप को पीया. ऋत सत्य की प्राप्ति कराता है. यह इंद्रियों में सामर्थ्य प्रदान कराता है. यह हमें दूध, अमृत व मधुर पदार्थ की प्राप्ति कराता है. (७८)
Prajapati drank the acceptable and non-acceptable form from the Vedas. The season leads to the realization of truth. It provides strength in the senses. It gives us milk, nectar and sweet substances. (78)