यजुर्वेद (अध्याय 19)
सर॑स्वती॒ मन॑सा पेश॒लं वसु॒ नास॑त्याभ्यां वयति दर्श॒तं वपुः॑। रसं॑ परि॒स्रुता॒ न रोहि॑तं न॒ग्नहु॒र्धीर॒स्तस॑रं॒ न वेम॑ ॥ (८३)
सरस्वती देवी ने दोनों अश््विनीकुमारों के साथ मिल कर मन से विशेष सुंदर तथा दर्शनीय शरीर की रचना की, रस (लहू) चुआया, धैर्य से विकार नाशक इस को शरीर में उपजाया. (८३)
Saraswati Devi, along with both Ashwinikumars, created a special beautiful and visible body with the mind, juice (blood) chewed, patience, the destroyer of disorders, it was produced in the body. (83)