यजुर्वेद (अध्याय 20)
यदापो॑ऽअ॒घ्न्या इति॒ वरु॒णेति॒ शपा॑महे॒ ततो॑ वरुण नो मुञ्च। अव॑भृथ निचुम्पुण निचे॒रुर॑सि निचुम्पु॒णः। अव॑ दे॒वैर्दे॒वकृ॑त॒मेनो॑ऽय॒क्ष्यव॒ मर्त्यै॒र्मर्त्य॑कृतं पुरु॒राव्णो॑ देव रि॒षस्पा॑हि ॥ (१८)
जल में जो अनुचित हैं, उन के प्रति बरुण देव हमें शाप मुक्त करने की कृपा करें. हे बरुण! आप निरंतर गतिशील हैं. आप अपनी गति मंद करने की कृपा करें. देवताओं के प्रति देव कार्यों में जो पाप किए हैं, आप उन का प्रायश्त्त कराइए. मनुष्यों के प्रति मानवीय व्यवहार में जो पाप किए हैं. उन से बचाइए. शत्रुओं से रक्षा कीजिए. (१८)
May Barun Dev bless us with the curse on those who are wrong in the water. O Barun! You are constantly dynamic. Please slow down your speed. You should atone for the sins committed in god's deeds towards the gods. The sins committed in human behavior towards human beings. Save them from them. Protect from enemies. (18)