यजुर्वेद (अध्याय 21)
होता॑ यक्षत् सु॒पेश॑सो॒षे नक्तं॒ दिवा॒श्विना॒ सम॑ञ्जाते॒ सर॑स्वत्या॒ त्विषि॒मिन्द्रे॒ न भे॑ष॒जꣳ श्ये॒नो न रज॑सा हृ॒दा श्रि॒या न मास॑रं॒ पयः॒ सोमः॑ परि॒स्रुता घृ॒तं मधु॒ व्यन्त्वाज्य॑स्य॒ होत॒र्यज॑ ॥ (३५)
होता ने दिनरात के लिए यज्ञ किया. होता ने अश््विनीकुमारों और सरस्वती देवी के लिए यज्ञ किया. उस यज्ञ से दिनरात में स्थित प्रकाश ने मन एवं श्रिया के साथ मांड, ओषधि तथा शयेन पत्र ने चमक को इंद्र देव में स्थापित किया. उन के लिए मधु, घी व दूध प्राप्त होता है. देवगण उन्हें ग्रहण करने की कृपा करें. यजमान सब के कल्याण के लिए यज्ञ करने की कृपा करें. (३५)
Hota performed yajna for the day and night. Hota performed yagna for Ashwinikumars and Saraswati Devi. From that yajna, the light located in the day and night established the glow of Mand, Oshadhi and Shayen Patra in Indra Dev along with mind and shriya. Honey, ghee and milk are obtained for them. May the gods please accept them. Please the host to perform yajna for the welfare of all. (35)