यजुर्वेद (अध्याय 23)
अ॒जारे॑ पिशङ्गि॒ला श्वा॒वित्कु॑रुपिशङ्गि॒ला।श॒शऽआ॒स्कन्द॑मर्ष॒त्यहिः॒ पन्थां॒ वि स॑र्पति ॥ (५६)
हे अध्वर्युओ! माया सब को निगलती है. बही विचित्र रूपों में शब्द को निगल जाती है. खरगोश उछलता है. विशेषतया सांप मार्ग पर सरकसरक कर चलता है. (५६)
O Adhwaryuo! Maya swallows everyone. The book swallows the word in bizarre forms. The rabbit bounces. In particular, the snake moves on the road. (56)