हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 29.2

अध्याय 29 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
घृ॒तेना॒ञ्जन्त्सं प॒थो दे॑व॒याना॑न् प्रजा॒नन् वा॒ज्यप्ये॑तु दे॒वान्।अनु॑ त्वा सप्ते प्र॒दिशः॑ सचन्ता स्व॒धाम॒स्मै यज॑मानाय धेहि ॥ (२)
हे अग्नि! आप देवताओं का पथ घी से अभिषिंचित व उन्हें हवि से आप्यायित (प्रसन्न) कर दीजिए. आप सातों दिशाएं सींच दीजिए. आप यजमान के लिए स्वधा धारिए. (२)
O agni! You anoint the path of the gods with ghee and please them with love. You water all seven directions. You save yourself for the host. (2)