यजुर्वेद (अध्याय 29)
ईड्य॒श्चासि॒ वन्द्य॑श्च वाजिन्ना॒शुश्चाऽसि॒ मेध्य॑श्च सप्ते।अ॒ग्निष्ट्वा॑ दे॒वैर्वसु॑भिः स॒जोषाः॑ प्र॒ीतं वह्निं॑ वहतु जा॒तवे॑दाः ॥ (३)
हे अग्नि! आप सर्वज्ञ हैं. आप वसुओं से प्रेम रखते हैं. आप प्रीतिपूर्वक अग्नि को ले जाने व अन्न को पवित्र कीजिए. आप बंदनीय हैं. (३)
O agni! You are omniscient. You love vasus. You lovingly carry the agni and sanctify the food. You are detainable. (3)