हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 29.26

अध्याय 29 → मंत्र 26 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
तनू॑नपात् प॒थऽऋ॒तस्य॒ याना॒न् मध्वा॑ सम॒ञ्जन्त्स्व॑दया सुजिह्व।मन्मा॑नि धी॒भिरु॒त य॒ज्ञमृ॒न्धन् दे॑व॒त्रा च॑ कृणुह्यध्व॒रं नः॑ ॥ (२६)
हे अग्नि! आप तन के रक्षक हैं. आप ऋत को अच्छी जिह्ला से सींचते हैं. आप बुद्धि और मनन से यज्ञ की बढ़ोतरी करते हैं. आप हमारे यज्ञ को देवताओं तक पहुंचाने की कृपा कीजिए. (२६)
O agni! You are the protector of the body. You water the rit with a good tongue. You increase yajna with intellect and meditation. Please convey our yajna to the gods. (26)