हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 29.27

अध्याय 29 → मंत्र 27 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
नरा॒शꣳस॑स्य महि॒मान॑मेषा॒मुप॑ स्तोषाम यज॒तस्य॑ य॒ज्ञैः।ये सु॒क्रत॑वः॒ शुच॑यो धिय॒न्धाः स्वद॑न्ति दे॒वाऽउ॒भया॑नि ह॒व्या ॥ (२७)
हे अग्नि! आप प्रशंसित हैं. हम आप की महिमा गाते हैं. आप श्रेष्ठ यज्ञ कर्म वाले, पवित्र, बुद्धिमान हैं. हम दोनों हकियों से आप का गुणगान करते हैं. (२७)
O agni! You are acclaimed. We sing the glory of you. You are the one with the best sacrificial deeds, pure, wise. We praise you to both the right. (27)