हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 29.37

अध्याय 29 → मंत्र 37 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
के॒तुं कृ॒ण्वन्न॑के॒तवे॒ पेशो॑ मर्याऽअपे॒शसे॑। समु॒षद्भि॑रजायथाः ॥ (३७)
हे अग्नि! आप अज्ञानी को ज्ञानी बनाते हैं. आप अपरूप को सुंदर रूप प्रदान करते हैं. आप उषा देवी के साथ उत्पन्न होते हैं. (३७)
O agni! You make the ignorant knowledgeable. You give a beautiful look to the aprup. You are born with Usha Devi. (37)