यजुर्वेद (अध्याय 29)
स्ती॒र्णं ब॒र्हिः सु॒ष्टरी॑मा जुषा॒णोरु पृ॒थु प्रथ॑मानं पृथि॒व्याम्।दे॒वेभि॑र्यु॒क्तमदि॑तिः स॒जोषाः॑ स्यो॒नं कृ॑ण्वा॒ना सु॑वि॒ते द॑धातु ॥ (४)
देवताओं से युक्त अदिति देवी प्रसन्नता सहित सविता देव को धारण करें. अदिति देवी का कुश का आसन विस्तृत है. अदिति देवी सुखदायी हैं. अदिति देवी पृथ्वी पर अपनी विशालता से फैली हुई हैं. (४)
Aditi Devi with gods should wear Savita Dev with happiness. Aditi Devi's posture of Kush is wide. Aditi Devi is happy. Aditi Devi is spread on earth with her vastness. (4)