यजुर्वेद (अध्याय 29)
दि॒वः पृ॑थि॒व्याः पर्योज॒ऽउद्भृ॑तं॒ वन॒स्पति॑भ्यः॒ पर्य्याभृ॑त॒ꣳ सहः॑।अ॒पामो॒ज्मानं॒ परि॒ गोभि॒रावृ॑त॒मिन्द्र॑स्य॒ वज्र॑ꣳ ह॒विषा॒ रथं॑ यज ॥ (५३)
हे पुरोहितो! आप स्वर्ग और पृथ्वी के तेज को सर्वत्र फेलाइए. वनस्पति से उगे प्राप्त हुए तेज को सर्वत्र फेलाइए. जल के साथ प्राप्त हुए तेज को सर्वत्र फैलाइए. इंद्र के बज्र की तरह हम रथ को यज्ञीय कार्य में लगाएं. रथ सूर्य की किरणों के समान चमकता है. (५३)
O priest! Spread the glory of heaven and earth everywhere. Spread the flame from the vegetation everywhere. Spread the glow received with water everywhere. Like Indra's bajra, we should put the chariot in the sacrificial work. The chariot shines like the rays of the sun. (53)