यजुर्वेद (अध्याय 3)
स॒जूर्दे॒वेन॑ सवि॒त्रा स॒जू रात्र्येन्द्र॑वत्या। जु॒षा॒णोऽअ॒ग्निर्वे॑तु॒ स्वाहा॑। स॒जूर्दे॒वेन॑ सवि॒त्रा स॒जूरु॒षसेन्द्र॑वत्या। जु॒षा॒णः सूर्यो॑ वेतु॒ स्वाहा॑ ॥ (१०)
सविता देव सहित और इं्रयुक्त रात्रि सहित अग्नि को आहुति प्रदान करते हैं. इन देवताओं से युक्त (जुड़े हुए) अग्नि इस आहुति को ग्रहण करने की कृपा करें. सविता देव सहित इंद्रयुक्त उषा देवी के साथ सूर्य के लिए यह आहुति प्रदान करते हैं. सूर्य इस आहुति को स्वीकार करने की कृपा करें. (१०)
Savita dev along with the inner night offer sacrifices to agni. May agni containing these deities be pleased to receive this sacrifice. Along with Savita Dev, Indra-yukta usha devi offers this sacrifice to the Sun. May the Sun please accept this sacrifice. (10)