यजुर्वेद (अध्याय 3)
अ॒ग्निर्ज्योति॒र्ज्योति॑र॒ग्निः स्वाहा॒ सूर्यो॒ ज्योति॒र्ज्योतिः॒ सूर्यः॒ स्वाहा॑। अ॒ग्निर्वर्चो॒ ज्योति॒र्वर्चः॒ स्वाहा॒ सूर्यो॒ वर्चो॒ ज्योति॒र्वर्चः॒ स्वाहा॑। ज्योतिः॒ सूर्यः॒ सूर्यो॒ ज्योतिः॒ स्वाहा॑ ॥ (९)
अग्नि प्रकाश है. प्रकाश अग्नि है. प्रकाश स्वरूप अग्नि के लिए हम आहुति प्रदान करते हैं. सूर्य प्रकाश है. प्रकाश सूर्य है. हम प्रकाश स्वरूप सूर्य के लिए आहुति प्रदान करते हैं. वाणी अग्नि है. अग्नि वाणी है. वाणी स्वरूप अग्नि के लिए आहुति प्रदान करते हैं. वाणी सूर्य रूप है. सूर्य वाणी रूप है. हम सूर्य को आहुति प्रदान करते हैं. प्रकाश सूर्य रूप है. सूर्य प्रकाश रूप है. हम सूर्य को आहुति प्रदान करते हैं. (९)
Fire is light. Light is agni. We offer sacrifices for agni in the form of light. The sun is light. Light is the sun. We offer sacrifices to the sun in the form of light. Speech is agni. Fire is speech. They offer sacrifices for agni in the form of speech. Speech is the form of the sun. The sun is the form of speech. We offer sacrifices to the sun. Light is the sun form. Sun light is the form. We offer sacrifices to the sun. (9)