हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 3.38

अध्याय 3 → मंत्र 38 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
आग॑न्म वि॒श्ववे॑दसम॒स्मभ्यं॑ वसु॒वित्त॑मम्। अग्ने॑ सम्राड॒भि द्यु॒म्नम॒भि सह॒ऽआय॑च्छस्व ॥ (३८)
हे अग्नि! आप बुलाने योग्य व सर्वविद्‌ हैं. आप हमारे लिए श्रेष्ठ धन धारण करने व हमारे पास आने की कृपा कीजिए. आप सम्राट्‌ हैं. आप शोभा सहित पधारिए और हमें भी शोभा प्रदान करने की कृपा कीजिए. (३८)
O agni! You are worthy and well known. Please hold the best money for us and come to us. You are the emperor. Come with grace and bless us too. (38)