हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 3.42

अध्याय 3 → मंत्र 42 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
येषा॑म॒द्ध्येति॑ प्र॒वस॒न् येषु॑ सौमन॒सो ब॒हुः । गृ॒हानुप॑ह्वयामहे॒ ते नो॑ जानन्तु जान॒तःगृ॒हानुप॑ह्वयामहे॒ ते नो॑ जानन्तु जान॒तः ॥ (४२)
प्रवास के समय जिस के बारे में सोचते हैं, अच्छे मन से उस घर में प्रसन्नता से रह रहे हैं. घर के पास रहने वाले देवता ज्ञानी हैं. वे देवता हमारे इस भाव को जानने की कृपा करें. (४२)
At the time of prabas, you are living happily in that house with a good heart. The gods living near the house are knowledgeable. May those gods please know this feeling of ours. (42)