हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 3.58

अध्याय 3 → मंत्र 58 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
अव॑ रु॒द्रम॑दीम॒ह्यव॑ दे॒वं त्र्य॑म्बकम्। यथा॑ नो॒ वस्य॑स॒स्कर॒द् यथा॑ नः॒ श्रेय॑स॒स्कर॒द् यथा॑ नो व्यवसा॒यया॑त् ॥ (५८)
रूद्र देव व त्र्यंबक को हम लोगों की रक्षा करनी चाहिए. वे हमारे लिए आयुकारी (बढ़ोतरी करने वाले), श्रेयकारी व व्यवसायों की बढ़ोतरी करने वाले हों. (५८)
Rudra Dev and Trimbak should protect us. They should be a growing, creditor and a business-enhancer for us. (58)