यजुर्वेद (अध्याय 3)
त्र्य॑म्बकं यजामहे सुग॒न्धिं पु॑ष्टि॒वर्ध॑नम्। उ॒र्वा॒रु॒कमि॑व॒ बन्ध॑नान्मृ॒त्योर्मु॑क्षीय॒ माऽमृता॑त्। त्र्य॑म्बकं यजामहे सुग॒न्धिं प॑ति॒वेद॑नम्। उ॒र्वा॒रु॒कमि॑व॒ बन्ध॑नादि॒तो मु॑क्षीय॒ मामुतः॑ ॥ (६०)
हे रूद्र! आप तीन दूष्टियों बाले हैं. हम आप की उपासना करते हैं. आप जीवन में सुगंध फैलाने व पौष्टिकता बढ़ाने वाले हैं. हमें संरक्षण प्रदान करते हैं. हम सांसारिक बंधनों से, वृक्ष से अलग हुए फल की भांति अलग हो जाएं; पर अमरता से नहीं. (६०)
O Rudra! You are three enemies. We worship you. You are going to spread fragrance in life and increase nutrition. Give us protection. Let us be separated from worldly bonds, like fruit separated from trees; But not with immortality. (60)