यजुर्वेद (अध्याय 30)
नृ॒त्ताय॑ सू॒तं गी॒ताय॑ शैलू॒षं धर्मा॑य सभाच॒रं न॒रिष्ठा॑यै भीम॒लं न॒र्माय॑ रे॒भꣳ हसा॑य॒ कारि॑मान॒न्दाय॑ स्त्रीष॒खं प्र॒मदे॑ कुमारीपु॒त्रं मे॒धायै॑ रथका॒रं धैर्य्या॑य॒ तक्षा॑णम् ॥ (६)
अंग चालन हेतु सूत, गीत के लिए नट, धर्म के लिए सभासद, नेतृत्व हेतु क्षमतावान, नरमाई हेतु मधुरभाषी, मनोविनोद हेतु स्वांग करने वाला उपयुक्त रहता है. आनंद प्राप्ति के लिए स्त्रियों के प्रति सख्य भाव, प्रबल मद (से उन्मत्त) के लिए कुमारी (वीरांगना) पुत्र, मेधावी के लिए रथकार और धैर्य के लिए गढ़िया (गढ़ाई करने वाला) उपयुक्त है. (६)
Yarn for limb movement, nut for song, member for religion, capable of leadership, soft-spoken, slang for manoeuvre is suitable. For pleasure, compassion for women is suitable, kumari (veerangana) son for strong item ( from frenzy), charioteer for meritorious and garhia (fabricator) for patience. (6)