हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

अध्याय 30 के सभी मंत्र

यजुर्वेद अध्याय 30 के सभी मंत्र हिंदी अर्थ के साथ

यजुर्वेद (अध्याय 30)

यजुर्वेद:
देव॑ सवितः॒ प्र सु॑व य॒ज्ञं प्र सु॑व य॒ज्ञप॑तिं॒ भगा॑य।दि॒व्यो ग॑न्ध॒र्वः॑ के॑त॒पू केतं॑ नः पुनातु वा॒चस्पति॒र्वाचं॑ नः स्वदतु ॥ (१)
हे सविता देव! आप प्रमुख उत्पादक व यज्ञ के जनक हैं. आप यज्ञपति को भाग्य प्रदान करने की कृपा कीजिए. आप दिव्य गंधर्व और पवित्र विचारों बाले हैं. आप हमारी विचार वाणी को भी पवित्र बनाने की कृपा कीजिए. आप वाणी पति हैं. आप हमें भी मधुर बचन दीजिए. (१)
O Savita Dev! You are the principal producer and father of yajna. Please give luck to yajnapati. You are the divine Gandharva and the holy thoughts. Please make our thoughts and speeches pure. You are a speech husband. You also give us a sweet escape. (1)

यजुर्वेद (अध्याय 30)

यजुर्वेद:
तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि।धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त् ॥ (२)
हे सविता देव! आप बरेण्य और देवताओं के लिए सौभाग्य धारते हैं. आप हमारी बुद्धि को भी प्रेरित करने की कृपा कीजिए. (२)
O Savita Dev! You have good fortune for the gods and goddesses. Please inspire our intellect too. (2)

यजुर्वेद (अध्याय 30)

यजुर्वेद:
विश्वा॑नि देव सवितर्दुरि॒तानि॒ परा॑ सुव। यद्भ॒द्रं तन्न॒ऽआ सु॑व ॥ (३)
हे सविता देव! आप सब देवों के देव हैं. आप हमारी कमियों को दूर कीजिए. आप जो भी हमारे लिए भत्र है, उसे लाने की कृपा कीजिए. (३)
O Savita Dev! You are all gods of gods. You remove our shortcomings. Please bring whatever you have for us. (3)

यजुर्वेद (अध्याय 30)

यजुर्वेद:
वि॒भ॒क्तार॑ꣳ हवामहे॒ वसो॑श्चि॒त्रस्य॒ राध॑सः। स॒वि॒तारं॑ नृ॒चक्ष॑सम् ॥ (४)
हे सबरिता देव! हम आप का आह्वान करते हैं. आप संरक्षक, धनवान, प्रेरक व सभी को संपत्ति देने वाले हैं. (४)
O Lord Sabrita! We call upon you. You are a protector, rich, motivator and an asset to all. (4)

यजुर्वेद (अध्याय 30)

यजुर्वेद:
ब्रह्म॑णे ब्राह्म॒णं क्ष॒त्राय॑ राज॒न्यं म॒रुद्भ्यो॒ वैश्यं॒ तप॑से॒ शू॒द्रं तम॑से॒ तस्क॑रं नार॒काय॑ वीर॒हणं॑ पा॒प्मने॑ क्ली॒बमा॑क्र॒याया॑ऽअयो॒गूं कामा॑य पुँश्च॒लूमति॑क्रुष्टाय माग॒धम् ॥ (५)
ब्राह्मण के लिए ब्रहाज्ञान, क्षत्रिय के लिए रक्षण, वैश्य के लिए पालनपोषण, शुद्र के लिए सेवा कतंव्य व उपयुक्त हैं. चोर के लिए अंधकार, नरक के लिए वीरघातक, नपुंसक के लिए पाप, खरीद के लिए पुरुषार्थी, काम के लिए व्यभिचारी अच्छी बोलने की शक्ति के लिए प्रमाण देने वाला उपयुक्त होता है. (५)
Brahmagyan for Brahmins, Rakshan for Kshatriyas, Rearing for Vaishya, Service for Shudras are justified and appropriate. Darkness for thief, heroic for hell, sin for impotent, purusharthi for purchase, adulterer for work are suitable for proof of good speech power. (5)

यजुर्वेद (अध्याय 30)

यजुर्वेद:
नृ॒त्ताय॑ सू॒तं गी॒ताय॑ शैलू॒षं धर्मा॑य सभाच॒रं न॒रिष्ठा॑यै भीम॒लं न॒र्माय॑ रे॒भꣳ हसा॑य॒ कारि॑मान॒न्दाय॑ स्त्रीष॒खं प्र॒मदे॑ कुमारीपु॒त्रं मे॒धायै॑ रथका॒रं धैर्य्या॑य॒ तक्षा॑णम् ॥ (६)
अंग चालन हेतु सूत, गीत के लिए नट, धर्म के लिए सभासद, नेतृत्व हेतु क्षमतावान, नरमाई हेतु मधुरभाषी, मनोविनोद हेतु स्वांग करने वाला उपयुक्त रहता है. आनंद प्राप्ति के लिए स्त्रियों के प्रति सख्य भाव, प्रबल मद (से उन्मत्त) के लिए कुमारी (वीरांगना) पुत्र, मेधावी के लिए रथकार और धैर्य के लिए गढ़िया (गढ़ाई करने वाला) उपयुक्त है. (६)
Yarn for limb movement, nut for song, member for religion, capable of leadership, soft-spoken, slang for manoeuvre is suitable. For pleasure, compassion for women is suitable, kumari (veerangana) son for strong item ( from frenzy), charioteer for meritorious and garhia (fabricator) for patience. (6)

यजुर्वेद (अध्याय 30)

यजुर्वेद:
तप॑से कौला॒लं मा॒यायै॑ क॒र्मार॑ꣳ रू॒पाय॑ मणिका॒रꣳ शु॒भे वप॒ꣳ श॑र॒व्यायाऽइषुका॒रꣳ हे॒त्यै ध॑नुष्का॒रं कर्म॑णे ज्याका॒रं दि॒ष्टाय॑ रज्जुस॒र्जं मृ॒त्यवे॑ मृग॒युमन्त॑काय श्व॒निन॑म् ॥ (७)
तपाने के लिए कुम्हार, माया के लिए कारीगर, रूप के लिए मणिकार, शुभ कार्य के लिए काटछांट में प्रवीण, लक्ष्यभेदी बाण के लिए इषुकार, आयुध के लिए धनुषकार, कर्म के लिए ज्याकार (डोरी बनाने वाले), आज्ञा देने हेतु रज्जुसर्जक (रस्सी बनाने वाले), मृत्यु के लिए कसाई, यम के लिए कुत्ते पालक की नियुक्ति की जानी चाहिए. (७)
Potters for heating, artisans for Maya, manikars for form, proficient in cutting for auspicious work, ishukar for targeting arrows, bows for armaments, jyankars for karma (string makers), rope makers (rope makers) to command, butchers for death, dog keepers for Yama should be appointed. (7)

यजुर्वेद (अध्याय 30)

यजुर्वेद:
न॒दीभ्यः॑ पौञ्जि॒ष्ठमृ॒क्षीका॑भ्यो॒ नैषा॑दं पुरुषव्या॒घ्राय॑ दु॒र्मदं॑ गन्धर्वाप्स॒रोभ्यो॒ व्रात्यं॑ प्र॒युग्भ्य॒ऽ उन्म॑त्तꣳ सर्पदेवज॒नेभ्योऽप्र॑तिपद॒मये॑भ्यः कित॒वमी॒र्यता॑या॒ऽअकि॑तवं पिशा॒चेभ्यो॑ विदलका॒रीं या॑तु॒धाने॑भ्यः कण्टकीका॒रीम् ॥ (८)
नदियों के लिए नाविक, रीछ आदि के लिए बनचरों (निषाद), शेर की तरह दुर्दम्य पुरुष के लिए प्रबल प्रतापी को, गंधर्व और अप्सराओं के लिए असंस्कारित, शोधार्थी हेतु उन्मत्त को, सांप, मनुष्य और देवों के लिए ज्ञानी को, जुए के लिए जुए में कुशल व्यक्ति को, उन्नति के लिए छलकपट मुकत को पिशाचों के लिए हृदय विदीर्ण करने बाले राक्षस जैसे लुटेरों के लिए रास्ते में कांटे (रोड़े) अटकाने बालों को नियुक्त किया जाना चाहिए. (८)
Sailors for rivers, bancharas (Nishads) for bears, etc., strong majestic for a man as refractory as a lion, undignified for Gandharvas and apsaras, frantic for researchers, snakes, humans and gods, a person skilled in gambling for gambling, a person skilled in gambling for gambling, for advancement, for robbers like demons who pierce hearts for vampires, thorns (obstacles) on the way. (8)
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