यजुर्वेद (अध्याय 31)
य॒ज्ञेन॑ य॒ज्ञम॑यजन्त दे॒वास्तानि॒ धर्मा॑णि प्रथ॒मान्या॑सन्।ते ह॒ नाकं॑ महि॒मानः॑ सचन्त॒ यत्र॒ पूर्वे॑ सा॒ध्याः सन्ति॑ दे॒वाः ॥ (१६)
देवताओं ने यज्ञ से यज्ञ किया. उस में धर्म को प्रथम आसन प्राप्त हुआ. जो लोग यज्ञ आदि विधिविधान से जीवन जीते हैं, ऐसे जीवन साधक महिमाशाली होते हैं. ऐसे व्यक्ति स्वर्ग प्राप्त करते हैं. (१६)
The gods performed yajna with yajna. In that, religion got the first seat. Those who live life by yagya etc. methods, such life seekers are glorious. Such people attain heaven. (16)