हरि ॐ

यजुर्वेद (Yajurved)

यजुर्वेद 31.9

अध्याय 31 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

यजुर्वेद:
तं य॒ज्ञं ब॒र्हिषि॒ प्रौक्ष॒न् पुरु॑षं जा॒तम॑ग्र॒तः।तेन॑ दे॒वाऽअ॑यजन्त सा॒ध्याऽऋष॑यश्च॒ ये ॥ (९)
सब से पहले यज्ञ से बाहर आए उस पुरुष को पूजा. उसी से देवताओं, ऋषियों और साधकों ने यज्ञ को उपजाया. (९)
First of all, worship that man who came out of the yagna. From that, the gods, sages and seekers raised the yajna. (9)